गली के कोने का
बिजली का खंभा
जिससे टिककर खड़ी
अपलक निहारती थी माँ
ससुराल जाते हुए मुझे
जब तक गली का
मोड़ ना आ जाए
मैं अब भी देखती हूँ उसे
हर बार आते वक़्त
तब तक.....
जब तक!!
मोड़ ना आ जाये
जबकि अब माँ
उससे टिकी नहीं होती
आज जाने मुझे
क्यों ऐसा लग रहा है
जैसे मुझसे मेरा कोई
अपना बिछड़ रहा है
कितने खुश हैं लोग
रास्ते का...!
चौड़ीकरण हो रहा है....
मोड़ ना आ जाये
जबकि अब माँ
उससे टिकी नहीं होती
आज जाने मुझे
क्यों ऐसा लग रहा है
जैसे मुझसे मेरा कोई
अपना बिछड़ रहा है
कितने खुश हैं लोग
रास्ते का...!
चौड़ीकरण हो रहा है....