पथ से बिना डिगे हर स्थिति हर तकलीफ से जूझते हुए हर रात तारों के साथ बतियाती हूँ/बिताती हूँ रात कटती है हर पल राह बनाते नए ख्वाब बुनते हर सुबह चलती हूँ उन राहों पर साथ उजालों के क्योंकि... मंज़िल तो ठहराव है और रास्ते सदा साथ होते हैं अनवरत साये की तरह सहचर बन कर जीवनपर्यंत...