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शनिवार, 12 जनवरी 2013

रोक सकोगे???... संध्या शर्मा

मेरे भीतर
आक्रोश की
उफनती
लहराती
फुंफकारती
धधकती
विकराल 
नदी है
रोक सकोगे???
सुना है
तुम...
समंदर हो