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सोमवार, 2 जनवरी 2017

आओ, नूतन वर्ष मनाएं ...



एक बरस और बीत रहा है
आओ हिलमिल हर्ष मनाएं 
आओ, नूतन वर्ष मनाएं 

जीवनतरु के नवपल्लव में 
नव आशा के पुष्प सजाएं 
आओ, नूतन वर्ष मनाएं

अपने तो सदा अपने हैं
गैरों को भी मीत बनाएं
आओ, नूतन वर्ष मनाएं   

नए-नए रंग हों नई उमंगें 
नयनों में उल्लास जगाएं 
आओ, नूतन वर्ष मनाएं 
 
नए गगन को छू लेने का 
मन में नव विश्वास जगाएं 
आओ, नूतन वर्ष मनाएं 

हरी धरा हो रुत मनभावन 
जीवन में मधुमास खिलाएं
आओ, नूतन वर्ष मनाएं  .... !

आप सबके लिए नववर्ष मंगलमय और खुशियों से भरा हो .... संध्या शर्मा 

मंगलवार, 1 जुलाई 2014

लफ़्ज़ों की छांव में..!



 चित्र- गूगल से साभार 

सोचती हूँ चलते-चलते
लड़खड़ाती साँसों के सफ़र में
कुछ ऐसा लिख जाऊं जिसमें
ताज़गी हो, उम्मीदें हों
रौनक हो, खुशियां हो 
जीवन की तेज़ धूप से झुलसा
हर एक आने वाला
इन लफ़्ज़ों की छांव में
राहतों की ठंडक पाए
कब लफ्ज़ बिखर जाएं
कब ये हाथ कंपकंपाएँ
जाने कब चिता के साथ
कागज़ भी राख बन जाए
राख बन चुके कागज़ में
कुछ देर तो चमकेंगे हर्फ़
वरना क्या फर्क पड़ता है
एक मेरे होने ना होने से
वैसे भी कोई नही आया
इस नश्वर लोक में
अमरफ़ल खाकर………।

बुधवार, 26 सितंबर 2012

साकार होंगे नवस्वप्न...संध्या शर्मा

बिलकुल नए अँधेरे में
आँखें मूंदकर देखे
नवस्वप्न....
क्या होगा इनका
साकार होंगे
या टूट जायेंगे
टूटना कोई नई बात नहीं
साध्य पीढ़ी नई
मेरी दृष्टी प्राचीन
तो क्या हुआ
जब रौशनी है
आकाश है
आशाओं का
भयावह काली रात
बीत जाएगी
उम्मीद है सूरज निकलने की
हौसला है क्षितिज छूने का
हमसे बचकर कहाँ जाएगी
सुहानी भोर जरुर आएगी....