गुरुवार, 13 अगस्त 2020

कुछ मन ने कहा ....

आँचल उड़ा 
नभ से बादल गिरा
आह छन गई
प्रीत बन गई
भावनाएं गहराई
अबीर बन गई
गीत बरसे
स्वर झनझनाने लगे
बिन बाती बिन तेल
दीप जगमगाने लगे...

जब तेरा साथ है
मन में विश्वास है
मेरे गीतों को
तेरा आधार है
तेरे बिन जीवन
निराधार है
जैसे पराग फूलों का
श्रृंगार है....   
  
 
           

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