मंगलवार, 17 अगस्त 2010

WAQT NAHI

है ख्वाब भरे इन आँखों में,
पर सोने का वक़्त नहीं,
ज़ख्म भरे हैं सीने में,
पर सीने का वक़्त नहीं,
हर पल दौड़ती दुनिया है,
पर जीने का वक़्त नहीं,
हजारों ग़म इस दिल में भरे,
पर रोने का वक़्त नहीं,
सारे नाम ज़ेहेम में हैं,
पर दोस्ती का वक़्त नहीं,
अब तू ही बता ऐ ज़िन्दगी,
कैसी है यह दीवानगी,
तेरा साथ निभाना है,
संग चलने का वक़्त नहीं..

12 टिप्‍पणियां:

  1. Please don't sound hopeless or else. this way or that Khushian bikhri padi hai , Sirf sabr kar swagat karne ki jaroorat hai ji.When night is over daylight enlightens lives. B+

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  2. Kavita is really nice.....but y r u so sad......
    Jaagti aankho se bhi khwaab dekhe jate hai....
    Kuch jakhm sine par leke log shaan se jeete hai....
    Jindagi morning walk nahi race hi hai....
    Aur dosto ka kya hai.....wo to aaj hai to kal nahi hai......

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  3. बहुत ही सुन्दर,शानदार और उम्दा प्रस्तुती!

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  4. सच कहा आपने दोस्त जी ......सब कुछ हो रहा है दुनिया मैं पर क्या करे बस वक्त ही नहीं बहुत खूब जी :)
    हर बार कि तरह सुन्दर रचना |

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  5. बढ़िया अभिव्यक्ति ....
    सादर...

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  6. खूबसूरत रचना. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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