साल साल बीतते बीतते
बीत गए दस साल
तुम साथ थी...
ऐसा लगता है ,
कल की ही बात थी,
कैसे भूलूंगी तुमको
मैं तो तुम्हारी परछाई हूँ
दुःख में ख़ुशी में
ख़ामोशी में, तन्हाई में
हर पल तुम्हे साथ पाती हूँ
और
चलती हूँ चुपचाप ....
तुम्हारी दिखाई राह पर
कल तुम्हारी बेटी भी
कुछ ऐसा कर जाए
दुनिया भी मुझमे
तुम्हारी ही झलक पाए...........