संग तेरा पाने क्या क्या करना होगा मितवा,
सूरज सा उगना होगा या चाँद सा ढलना होगा.
सूरज सा उगना होगा या चाँद सा ढलना होगा.
खूब चले मखमली राहों पर हम तो मितवा,
काटों भरी राह में भी हँसकर चलना होगा.
काटों भरी राह में भी हँसकर चलना होगा.
तारीकी राहों की खूब बढ चुकी है मितवा,
चिंगारी को एक शोला बनके जलना होगा.
चिंगारी को एक शोला बनके जलना होगा.
तेरी आहट पे मचले हैं अरमान मेरे मितवा,
लगता है सर्द रातों को करवटें बदलना होगा.
लगता है सर्द रातों को करवटें बदलना होगा.
जिल्ले इलाही ने लगा रखा है पहरा मितवा,
आएगा दिन के उन्हे निजाम बदलना होगा.
आएगा दिन के उन्हे निजाम बदलना होगा.
तरसते है परवाज को कैद में परिंदे मितवा,
रहमते ख़ुदा हो गर तो उन्हे भी उड़ना होगा.
रहमते ख़ुदा हो गर तो उन्हे भी उड़ना होगा.
सांझ हुई चाँद-तारे निकल चुके हैं मितवा,
परींदे जा चुके घर अब हमें भी चलना होगा....
परींदे जा चुके घर अब हमें भी चलना होगा....
