संघर्ष लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
संघर्ष लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 20 जुलाई 2011

मैं संसार सजाना चाहती हूँ...." संध्या शर्मा


अन्याय की धुआंधार बारिश में,
संघर्ष वृक्ष के बीज का,
तू अंकुर बन,
जड़ जमा ले गहरे तक और,
फल - फूल,
तूफान उठें, या
गरजें बादल,
तुझे आकाश छूना है,
अपने जैसे असंख्य बीजों को,
जन्म देना है.
"मैं एक वृक्ष नहीं, 
 जंगल उगाना चाहती हूँ...
 एक बाग नहीं,
संसार सजाना चाहती हूँ...."