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सोमवार, 10 सितंबर 2012

कोई आया भी तो......संध्या शर्मा

जब बीत गया सावन  
घिरकर क्या करेंगे घन
सूखे मन के उपवन में
कोई आया भी तो क्या आया

ख़ुशी बसंती बयार हो
कोयल गीत गाती हो
बसंती राग पतझर ने
कोई गाया भी तो क्या गाया

लगी हो आग सावन में
तन-मन झुलसा हो
जल रहा गीत जब हो
कोई मल्हार गाया तो क्या गाया
                                                                                     
खुली रखीं प्रतीक्षा में
जाने कब से ये आँखें
थककर मूँद ली पलकें
कोई आया भी तो क्या आया

तड़पकर बूँद को जिसकी
प्यासा मर गया चातक
सजल घन मौत पर उसकी
कोई रोया भी तो क्या रोया

जीवन भर उजाले को
भटकती रही व्याकुल
जलाकर दीप समाधि पर
कोई लाया भी तो क्या लाया