"सेल्फी मैंने ले ली आज, सेल्फी मैंने ले ली आज" ढिंचैक पूजा के इस वाहियात गर्दभगान से आज के युवाओं की मानसिकता का पता चलता है कि स्वचित्र के प्रति अनुराग किस जानलेवा स्तर तक बढ़ गया है। पिकनिक स्पॉट, समंदर की लहरें, ऊंची चट्टानें, नदी की जलधारा, चलती ट्रेन जैसी खतरनाक ज़ोखिम भरी जगहें युवाओं को सेल्फी लेने के लिए आकर्षित करती है और यही दीवानगी जानलेवा साबित हो रही है।
पिछले दिनों गुरुपूर्णिमा के दिन नागपुर के समीप वेना डैम में नाव पर सेल्फी लेने के चक्कर में घटी हृदय विदारक घटना आठ युवकों की मौत का कारण बनी। जिसमे से चार तो परिवार के इकलौते चिराग़ थे। एक के विवाह को सिर्फ डेढ़ वर्ष हुआ था, और चार माह की बेटी। मृतकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
सेल्फी का क्रेज दरअसल एक जानलेवा एडवेंचर साबित हो रहा है जहां मौज-मस्ती की चाह और कुछ नया कर गुजरने ख्वाहिश रखनेवाले (ज्यादातर युवाओं) को जान से हाथ धोना पड़ता है या अन्य दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है। यह अजीब विडंबना है कि महज एक सेल्फी के लिए युवा अपनी ज़िन्दगी से हाथ धो बैठ रहे हैं। सेल्फी से जुड़ा एक्सपेरिमेंट दरअसल जानलेवा साबित हो रहा है लेकिन ज्यादातर युवा इसे नजरअंदाज कर रहे है जिससे भयावह स्वरूप हम सामने देख रहे है, जो चिंतित करनेवाला है।
सेल्फी जानलेवा साबित हो रही है उसके लिए सावधानी बरतना जरूरी है। सेल्फी की आस में ऐसे 'जानलेवा एवडेंचर' से बचा जाए जहां जान का खतरा हो, किसी दुर्घटना का अंदेशा हो। इसके लिए जरूरी है कि चलती ट्रेन, चलती गाड़ी ,पहाड़ों और छत, गहरे पानी में नाव आदि पर सेल्फी लेने से बचना चाहिए। ऐसी जगहों पर ज्यादातर ये देखा गया है कि 'परफेक्ट' सेल्फी पिक्चर के चक्कर में दुर्घटना हो जाती है जिसका हमें कतई अंदाजा नहीं होता। सेल्फी का शौक या क्रेज बुरा नहीं कहा जा सकता लेकिन यह उस हद तक नहीं होना चाहिए जहां जिंदगी सुरक्षित नहीं रह जाती और मुश्किलों में घिर जाती है। सेल्फी की 'अति' पर नियंत्रण रखने की जरूरत है।
ख़्वाहिशों या क्रेज की नदिया में ऐसी भंवर हर्गिज ना हो जिससे आपकी जिंदगी पर किसी भी प्रकार का खतरा मंडराता हो। एक जीवन के साथ उसके परिवार, उसके अपनों का स्नेह, जीवन और सपने जुड़े होते हैं। जिंदगी अनमोल है, इसे सेल्फी जैसे क्रेज से खत्म करना कहां की समझदारी है?
न जाने कितने प्राण सेल्फी के चक्कर में गए हैं तब भी लोग सावधानी नहीं बरत रहे। "बड़े भाग मानुस तन पावा, सुर दुर्लभ सब ग्रंथहि गावा।।" जीवन कितना महत्वपूर्ण है, अगर एक बार प्राण निकल गये तो दुबारा नहीं लौटने वाले, फोटो का क्या है, यहाँ नही तो वहाँ ली जा सकती है, इसलिए सावधानी रखना बहुत ही आवश्यक है जिससे परिजनों को दारुण दुख सहना न पड़े।