शनिवार, 13 जनवरी 2024

हम सदा रहेंगे...

 उस दिन....!

जब ना हम होंगे ना तुम

तब भी मिलेंगे 

अपनी कविताओं में

हम तुम 

धरती आकाश होंगे

चांद सूरज होंगे

बारिश भी होगी

बसंत भी आएगा

नदियां, झरने, पंछी

झाड़-पेड़ , पहाड़ होंगे

यह होने का क्रम

चलता रहेगा

और इसी तरह

हम थे

हम हैं 

हम सदा रहेंगे...

____संध्या शर्मा ____



5 टिप्‍पणियां:

  1. ये शास्वत सत्य है, बहुत ही सुन्दर सृजन 🙏

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  2. इस कविता में मुझे सबसे खास इसकी सादगी लगी। आप बिना शोर किए बहुत बड़ी बात कह जाते हैं। प्रेम यहाँ किसी नाम या रूप में बंधा नहीं, वह मौसम, आकाश और समय बनकर बहता रहता है।

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