शनिवार, 4 जून 2022

क़वायद .... ! - संध्या शर्मा

 

जब बारिश आती है 

शुरू हो जाती है

क़वायद  .... !

एक तरफ धरती की

दूसरी ओर इंसान की

धरा ढूंढती है कॉन्क्रीट के बीच

जल को आत्मसात करने की जगहें

और इंसान तलाशता है

पानी से बचने का ठौर

__संध्या शर्मा__

10 टिप्‍पणियां:

  1. गहन क्षणिका । धरा पाट दी कंक्रीट से ।

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  2. अब तो कंक्रीट के जंगल ही ज्यादा उग रहे हैं, हरियाली न दम तोड़।

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  3. कंक्रीट का काल हरियाली निगल रहा है।

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  4. बेजोड़, सटीक ! इंसान का बनाया जाल है... बारिश क्या करे...।

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  5. जब बारिश आती है
    शुरू हो जाती है
    क़वायद .... !
    साधुवाद..
    सादर..

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  6. वाह बहुत गहन बात कही!!सुन्दर रचना

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  7. इंसान अपनी करनी को नहीं देखता , धरा को खुद से दूर किये जा रहा है

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  8. बहुत अच्छी और सुंदर रचना

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