मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016

इसलिए तो हम सब हैं...

सूरज
किरणें
चाँद 
चांदनी 
बादल 
बरखा
बसंत
बहार
फूल
खुशबु
रास्ते
मंज़िल
साँसे
धड़कन
प्रेम
विश्वास
दुनिया
खुशियाँ
सपने
अपने हैं
इसलिए तो हम सब हैं...

शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

ब्रह्मांड दूरियों का….!

सरोकार छूट जाऐं

बंधन टूट जाऐं

रस्ते बदल जाते हैं

रिश्ते रूठ जाते हैं

जैसे......!

दो बिन्दुओं का योग

सरल रेखा बनता है

लेकिन एक ही बिंदु से

निकलकर भी

मुंह मोड़कर

एक दूजे से

दो दूर जाती हुई

सरल रेखाओं के बीच

विस्तृत होता जाता है

एक अनंत विस्तार

जो रच ही देता है

एक न एक दिन

ब्रह्मांड दूरियों का….!

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

स्वागत नवीनता का ...

परिवर्तन प्रकृति का नियम है, जो कभी परिवर्तित नहीं होता। सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हर परिवर्तन नवीनता से भरपूर होता है, तो आइये इस नवीनता का स्वागत करें। नववर्ष आप सबके लिए मंगलकारी हो..... 



क्या होगा
क्यों होगा
कब होगा
कैसे होगा
नई शंकाएँ
नए सवाल
जो होगा
जब होगा
तभी होगा
समय भी पाबंद है
खुद समय का
चाहकर भी 
नही लाँघ सकता
समय की सीमा 
क्यों न साथ चलें...
संध्या शर्मा

सोमवार, 7 दिसंबर 2015

समझ...

इस ब्रह्माण्ड की 
दसों दिशाओं ने
शस्य स्यामला धरा की
मुस्काती फिजाओं ने
महकती हवाओं ने
झूमती लताओं ने
बल-खाती नदियों ने
कल-कल बहते झरनों ने
माटी के धोरों ने
कर्मठ शूरवीरो ने
मिट्टी के कण कण ने
स्वदेश के जन जन ने
कह दी अमर कहानी
सब गर्वित हैं मातृभूमि पर
सिवाय उनके ....
जो बैठे रहे सिर्फ ढोंग रचाकर
न खुद समझ सके 'देशप्रेम'
न किसीको समझा पाए...