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बुधवार, 3 दिसंबर 2025
ये क्या है...? संध्या शर्मा
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ये क्या है? ये पुलक है, ये झंकार है, ये अधूरे बोलों का संचार है। ये चुप्पी में सिमटा कोलाहल है, ये मन से उठता हालाहल है। ये क्या है? ये प्र...
10 टिप्पणियां:
शनिवार, 31 दिसंबर 2016
आकांक्षा...संध्या शर्मा
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आने वाला वर्ष सभी के लिए मंगलमय हो इसी कामना के साथ आप सभी को सहपरिवार नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ... ओ अम्बर! मैंने कभी नहीं चाहा त...
6 टिप्पणियां:
शनिवार, 13 दिसंबर 2014
सम्मोहन ...
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.... अनंत सागर के खारे पानी में अकेली खड़ी वह हर क्षण धीरे-धीरे घुलती जा रही है सांसें रुकने को हैं, जैसे-जैसे डूबती...
9 टिप्पणियां:
शनिवार, 19 मई 2012
आकांक्षा... संध्या शर्मा
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खूब सो लिए जाग जाओ न, तुम आलस दूर भगाओ न. कल कर लेना कल की बातें, तुम गीत सुहाने दुहराओ न. गहरे सागर से चुन-चुन कर, चमकीले मोती ले ...
17 टिप्पणियां:
गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012
मुझे डर है... संध्या शर्मा
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दरअसल मैं रेगिस्तान में ही पैदा हुई हूँ और तुम ले जा रहे हो मुझे सागर में मुझे प्यास नहीं कोई चाह नहीं हाँ डर है...! कहीं सागर निगल न ले मे...
26 टिप्पणियां:
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