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बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

मेरे गीतों का आधार... संध्या शर्मा


क्या बिना अभिव्यक्ति के

प्यार प्यार नहीं होता

क्यों इतना मुश्किल है

प्रेम को दर्शाना

क्यों न अंतर में

इस प्रेम को जियें

आखों से कहें

आँखों की सुनें...





आँचल उड़ा

नभ से बादल गिरा

आह छन गई

प्रीत बन गई

भावनाएं गहरी

अबीर बन गई

गीत बरसे

स्वर झनझनाने लगे

बिन बाती, तेल

दीप जगमगाने लगे...






जब तेरा है साथ  

मन में विश्वास है

मेरे गीतों को

आधार है तेरा 

बिन तेरे जीवन

निराधार है मेरा 

जैसे पराग फूलों का

श्रंगार है घनेरा

आएगा कभी

फ़िर नया सवेरा...

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