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मेरी कविताएं
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सोमवार, 29 अगस्त 2011
मुझे कुछ कहना है ...! संध्या शर्मा
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देख सकती हैं नन्ही सी आँखे भी सपने बड़े - बड़े. छिपा सकेगा सूरज को बादल भी आखिर कब तक...? अपनों से युद्ध है लड़ना होगा अर्जुन की ...
30 टिप्पणियां:
गुरुवार, 25 अगस्त 2011
नया सवेरा आयेगा..... संध्या शर्मा
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आज अपनी आँखों के सामने, भ्रष्टाचार को मिटते देखा, ईमानदारी को जागते देखा, लगा इंसानियत जाग रही है, क्रांति रंग ला रही है, एक ट्रेफ...
22 टिप्पणियां:
सोमवार, 15 अगस्त 2011
क्या यही है आज़ादी ?? संध्या शर्मा
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मेरी एक पुरानी रचना जिसे आप सभी के साथ फिर से साझा करना चाहती हूँ... आज़ादी -आज़ादी ........ मनाते आ रहे हो 65 सालों से जश्न , पर मैं पूछत...
21 टिप्पणियां:
बुधवार, 10 अगस्त 2011
तू जरूर आना... संध्या शर्मा
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बचपन में कहती थी, चंदा है वीर मेरा, नहीं समझती थी तब... चाँद दिखता तो रोज है, पर होता दूर है, अब समझती हूँ... कोई पास होकर भी दू...
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