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गुरुवार, 28 जून 2012
सिर्फ मुझे... संध्या शर्मा
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तुम्हारे नयन बोलते हैं सुनाई देते सिर्फ मुझे... तुम्हारा आना श्रावणी फुहार भिगोती है सिर्फ मुझे... तुम्हारा साथ बसंत जैसे मह...
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सोमवार, 30 अप्रैल 2012
प्रणय.... संध्या शर्मा
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तरंग सरिता की हिलोरें लेने लगीं नयनो में बांध भावनाओं का फूट पड़ा शिथिल कर गईं पलकों को भावहीन हवाएं अंतस अनंत गहरा घोर अँधेरा मौन...
28 टिप्पणियां:
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