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मेरी कविताएं
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शनिवार, 6 फ़रवरी 2016
परिचय से पहले बोलोगे...
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दूर गगन में सुकुवा उगे शीतल मंद पवन चले परिन्दे निकले नीड़ों से वन में सुंदर फ़ूल खिलें भोर नवल सूरज ले आए धरती पर प्रकाश ...
15 टिप्पणियां:
मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016
इसलिए तो हम सब हैं...
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सूरज किरणें चाँद चांदनी बादल बरखा बसंत बहार फूल खुशबु रास्ते मंज़िल साँसे धड़कन प्रेम विश्वास दुनिया खुशियाँ सपने अपने हैं इसलिए तो हम सब ...
9 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 22 जनवरी 2016
ब्रह्मांड दूरियों का….!
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सरोकार छूट जाऐं बंधन टूट जाऐं रस्ते बदल जाते हैं रिश्ते रूठ जाते हैं जैसे......! दो बिन्दुओं का योग सरल रेखा बनता है लेकिन एक...
5 टिप्पणियां:
गुरुवार, 31 दिसंबर 2015
स्वागत नवीनता का ...
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परिवर्तन प्रकृति का नियम है, जो कभी परिवर्तित नहीं होता। सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाए तो हर परिवर्तन नवीनता से भरपूर होता है, तो आइये इस...
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