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मेरी कविताएं
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मंगलवार, 21 जनवरी 2014
मंज़िल की ज़ानिब....
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लम्हा नहीं थी एक मैं जहान में सदा रही हूँ, ख़यालों में रहे हमेशा मैं तुमसे जुदा नही हूँ. किस्से गढे इस जीस्त-ए-सफ़र ने हजारों बार ,...
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शनिवार, 11 जनवरी 2014
अंतिम छोर...
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प्रायवेट वार्ड नं. ३ जिन्दगी/मौत के मध्य जूझती संघर्ष करती गूंज रहे हैं तो केवल गीत जो उसने रचे जा पहुंची हो जैसे सूनी बर्फीली वादियों...
15 टिप्पणियां:
गुरुवार, 2 जनवरी 2014
मरीचिका...
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हर पल कल की आशा हर पल से मुग्धता एक डोर बांधे रखती है जीवन को साँसों से कुछ रहस्य का मोह ज्ञात का सम्मोह अज्ञात को जानने का मोह और भी गह...
16 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013
सपनों के लिए ....!!!
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सुबह तो कबकी हो गई सूरज चढ़कर ढल चुका रात भर भटकता रहा सपनों की दुनिया में तड़के ही सो सका है रात जब लेटा था तो ऐसे लग रहा...
11 टिप्पणियां:
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