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मेरी कविताएं
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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013
रामरती...
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चिड़ियों की चहचहाहट होते ही नींद से उठकर छुई खदान जाना और शाम ढले वापस आकर छुई - मिट्टी के एकसार ढ़ेले तैयार करके सुखाने के लिए रखना. यही ...
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मंगलवार, 23 अप्रैल 2013
नवा - जूना...संध्या शर्मा
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अरसे से ठसाठस भरा अस्त-व्यस्त था मन का कमरा आज समय मिला नए - पुराने विचारों- भावों रिश्ते-नातों यादों-अहसासों को झाड़-पोंछ करीने से ...
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बुधवार, 17 अप्रैल 2013
सदा नीरा ...संध्या शर्मा
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ना कोई डोर/ नातों की ना कोई बंधन/ वादों का फिर भी... साथ चलते जाना सदा नीरा के सिमटने से मिलन का अहसास पास होकर भी दूर होना दो किनारे ह...
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शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013
"युगे-युगे"... संध्या शर्मा
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मिथ्या दंभ में चूर स्वयं को श्रेष्ठ घोषित कर कोई श्रेष्ठ नहीं हो जाता निर्लज्जता का प्रदर्शन निशानी है बुद्धुत्व की सूर्य को क्या जरुरत दी...
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