पेज
(यहां ले जाएं ...)
मुखपृष्ठ
मेरी कविताएं
▼
सोमवार, 1 अप्रैल 2013
पराई प्यास....
›
अधपके बालों के बीच दर्द भरा निस्तेज चेहरा निढाल, बेहाल जैसे गिन रहा हो अपनी ही सांसों का आना-जाना ज्वर की तपन से तप्त रग-रग में द...
18 टिप्पणियां:
मंगलवार, 26 मार्च 2013
होली... संध्या शर्मा
›
होली के रंग आपके जीवन को नए हर्ष और उल्लास से भर दें. होली की बहुत-बहुत बधाई और ढेर सारी शुभकामनायें .... (होली खेलें लेकिन जीवन दायिनी अ...
27 टिप्पणियां:
गुरुवार, 21 मार्च 2013
बिरवा शब्द का.... संध्या शर्मा
›
संभव है वह भूल जाए लेकिन मैंने संभाल रखा है तुम न पहचानो मगर बेखटके आता-जाता है मेरी कविताओं में उसका वह एक शब्द ... देखना एक न एक दिन मै...
29 टिप्पणियां:
रविवार, 17 मार्च 2013
पहचान... संध्या शर्मा
›
मेरी ही आँखें मेरे ही अक्स को घूरती हैं अनजान की तरह वो कुछ शब्द जो यकीं दिलाते मुझे मेरे होने का क्यों नहीं बोलती कितना मुश्किल है इनकी ...
17 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें