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मेरी कविताएं
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बुधवार, 28 नवंबर 2012
ये सुंदरियां...संध्या शर्मा
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अभिव्यक्ति की सुंदरियां भावों के कालजयी मंच पर हंसती, मुस्कुराती,गाती ख़ुशी से थिरक रही हैं मंद, तेज़ चाल चलती शब्दों की रंग बिरंगी चूनर पहन...
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मंगलवार, 13 नवंबर 2012
एक दीपावली ऐसी भी ... संध्या शर्मा
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दीवाली सभी के लिए आती है बिना किसी भेद-भाव के, रोजी-मजूरी करने वाला हो या अरबपति-खरबपति सभी लक्ष्मी जी को ध्याते हैं। इस कमरतोड़ महंगाई क...
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बुधवार, 7 नवंबर 2012
मेरे कालिदास...संध्या शर्मा
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हर बार.......... जब भी कुछ लिखने बैठती हूँ बहुत कोशिश करती हूँ तुमको ना लिखूं फिर भी आ ही जाते हो तुम कहीं ना कहीं से तुम्हारे आते ...
30 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 2 नवंबर 2012
' पूर्णस्य पूर्णमादाय '... संध्या शर्मा
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( 'पूर्णस्य पूर्णमादाय ' कहने से तात्पर्य यह है की यदि तुम स्वयं इस सत्य की अनुभूति कर सको कि वही ' पूर्ण ' तुम्हारे साथ स...
19 टिप्पणियां:
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