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मेरी कविताएं
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सोमवार, 27 अगस्त 2012
कोरे पन्ने जीवन के... संध्या शर्मा
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बहुत कुछ लिखना है जीवन की किताब में कुछ शब्द उकेरना है कुछ भाव समेटना है कहाँ से शुरुआत करूँ कहाँ जाकर रुकूँ कभी लगता है भूत लिखूं भव...
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मंगलवार, 21 अगस्त 2012
चिरनिद्रा से वापसी...संध्या शर्मा
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आज अचानक असमय सो गई सोते हुए स्वपन में जाग उठी उठते ही कविता की कॉपी याद आई बैचेनी से इधर-उधर ढूँढने लगी अचानक पाँव तले पानी महसूस हुआ...
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मंगलवार, 14 अगस्त 2012
स्वतंत्रता दिवस और हम... संध्या शर्मा
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आ गया फिर एक स्वतंत्रता दिवस. देश के प्रति अपनी भावनाएं अभिव्यक्त करने का दिन.आज़ादी को सेलीब्रेट करने का दिन. हमारे यहां त्योहारों की विशाल ...
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बुधवार, 8 अगस्त 2012
माँ... संध्या शर्मा
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यह कविता नहीं, कुछ बाते हैं, जो कहना चाहती हूँ, शायद मैं ठीक से कह भी नहीं सकी... मेरी माँ अर्धमूर्छित अवस्था में भी हमारी चिंता करती...
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