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मेरी कविताएं
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गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019
जल्दी आना ओ चाँद गगन के .....
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करवा चौथ मैं यह व्रत करती हूँ अपनी ख़ुशी से बिना किसी पूर्वाग्रह के करती हूँ अपनी इच्छा से अन्न जल त्याग क्योंकि मेरे लिए...
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शनिवार, 31 अगस्त 2019
मेरी नज़्म... संध्या शर्मा
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ख़यालों के पंख लगाकर ख़्वाबों की उड़ान भरकर कितनी भी दूर क्यों न चली जाए लेकिन लौट आती है "मेरी नज़्म" उतर आती है ज़मी पर मेरे स...
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सोमवार, 19 अगस्त 2019
कौना सी गुइयाँ सासरें, माई सावन आये
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नव पल्लव झूम उठते हैं , डालियाँ बल खाने लगती हैं। दादुर , मोर , पपीहे सरगम छेड़ने लगते हैं तो लोकजीवन भला कैसे पीछे रह जाये। क्यों न वह भी...
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गुरुवार, 27 जून 2019
तुम्हारी कविता एक बगिया है....
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तुम्हारी कविता में खुश्बू है, फूल हैं पत्तियां, टहनी भी एक माली है जो करीने से संवारता है शब्दों के नन्हे पौधे देता है भावों ...
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