पेज
(यहां ले जाएं ...)
मुखपृष्ठ
मेरी कविताएं
▼
सोमवार, 27 जुलाई 2015
सुप्रभात...
›
किरणों का साथ पाकर जीना सीखती आशाएँ मानो उड़ना चाहती हैं क्षितिज के भी उस पार अजब सुर्ख एहसास से जाग उठी सुबह के साथ.....
6 टिप्पणियां:
बुधवार, 13 मई 2015
जीवन पथ ...
›
हर सुबह के इंतज़ार में अंधियारे से लड़ना है हर पल घटती सांसें हैं पल को जीभर जीना है हर रिश्ते हर नाते को राख यही हो जाना है ...
17 टिप्पणियां:
मंगलवार, 28 अप्रैल 2015
जीवन राग....
›
उर की अनंत गहराइयों में बिन खाद पानी के जन्मे बीज होते है स्वप्न जब बीज है तो पनपेगा फूलेगा फलेगा और आकार लेगा विशाल वृक्...
11 टिप्पणियां:
मंगलवार, 14 अप्रैल 2015
आशा पल्लव...
›
याद है तुम्हें ...? उस नन्हे पौधे को रोपत़े हुए कितने विश्वास से कहा तुमने जब यह दरख्त बन जाएगा एैसे फूल खिलेंगे जिससे सुवास...
5 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें