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मेरी कविताएं
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बुधवार, 13 मई 2015
जीवन पथ ...
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हर सुबह के इंतज़ार में अंधियारे से लड़ना है हर पल घटती सांसें हैं पल को जीभर जीना है हर रिश्ते हर नाते को राख यही हो जाना है ...
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मंगलवार, 28 अप्रैल 2015
जीवन राग....
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उर की अनंत गहराइयों में बिन खाद पानी के जन्मे बीज होते है स्वप्न जब बीज है तो पनपेगा फूलेगा फलेगा और आकार लेगा विशाल वृक्...
11 टिप्पणियां:
मंगलवार, 14 अप्रैल 2015
आशा पल्लव...
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याद है तुम्हें ...? उस नन्हे पौधे को रोपत़े हुए कितने विश्वास से कहा तुमने जब यह दरख्त बन जाएगा एैसे फूल खिलेंगे जिससे सुवास...
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शुक्रवार, 20 मार्च 2015
नव संवत्सर- गुड़ी पाड़वा
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चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को 'गुड़ी पाड़वा' या नववर्ष का आरम्भ माना गया है। ‘गुड़ी’ का अर्थ होता है विजय पताका । इसे हिन्दू नव स...
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