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मेरी कविताएं
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सोमवार, 28 अप्रैल 2014
इतिहास लिख दो...
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हमारे नाम ज़िन्दगी हर सांस लिख दो, रड़क रही जो सीने में वो फ़ांस लिख दो। मंज़िल जो हमसे अभी दूर बहुत दूर है, ख...
21 टिप्पणियां:
शनिवार, 12 अप्रैल 2014
अनवरत आशा....
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घंटाघर की घड़ियों को बड़े गौर से देखते हुए एक बुज़ुर्ग से मैंने जानना चाहा उनकी उत्सुकता का कारण तो वे मुस्कुराते हुए बोले छियासठ बरस हो ...
15 टिप्पणियां:
रविवार, 6 अप्रैल 2014
धुंधकारी...
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सोचो जरा उन्हें भी तो चाहिए उगते सूरज की उजली किरणें शोषण से मुक्ति अपने बनते हो न चलो तुम्ही बताओ किस श्रे...
12 टिप्पणियां:
बुधवार, 26 मार्च 2014
सत्ता सुख और लोककल्याण- अभी रोग दूर होना शेष है...
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लोककल्याण की आकांक्षा धारण किए विश्व इच्छा और कल्पना के भयानक युद्ध का अखाडा बना हुआ है. जब भी इच्छा और कल्पना के बीच संघर्ष होता है मनुष...
10 टिप्पणियां:
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