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मेरी कविताएं
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शुक्रवार, 29 नवंबर 2013
दर्द...!!!
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भरोसे के छल में लिपटे जितने तीर थे वक़्त के तरकश में सारे के सारे छोड़े जा चुके वज़ूद की पीठ पर छलनी हो चुके तार-तार हो चुके भोले-भाले...
9 टिप्पणियां:
गुरुवार, 14 नवंबर 2013
फूलों के मौसम में...
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. शाम अभी ढली नही सुबह अभी हुई नही आओ करें इंतज़ार गुनगुनी सी धूप में ठंडी-ठंडी बयार का ढलती हुई शाम का धुंधली सी सुबह का रूठी...
13 टिप्पणियां:
गुरुवार, 7 नवंबर 2013
यादें हर सांस में...
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यह सोचे बगैर कि जब कोई सवाल करेगा निरुत्तर हो जाउंगी लिख लेती हूं तुम्हारी यादों को रख लेती हूं संदूक में तह लगा रेशमी अहसासो...
12 टिप्पणियां:
गुरुवार, 24 अक्टूबर 2013
कहो कछु गलत तो नईया ???
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अजब जमानो आयो रे भैया मंहगाई ने कराओ ता थैया सस्ता मोबाईल मंहगा तेल चल रओ मनरेगा को खेल खुद की भर गई सारी जेब दब गए हैं तु...
16 टिप्पणियां:
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