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मेरी कविताएं
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सोमवार, 24 जून 2013
स्थायित्व पाना है...?... संध्या शर्मा
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"बीत गई सो बात गई" भरोसा न करना इस कथनी पर सिर्फ धोखा है भूतकाल निश्चित वर्तमान अनिश्चित भविष्य में क्या होगा न तुम जानो न हम ...
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गुरुवार, 6 जून 2013
व्याकुल पीड़ा ... संध्या शर्मा
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.... कांक्रीट के जंगल में अकेला खड़ा वटवृक्ष भयभीत है...? व्याकुल है आज चौंक उठता है हर आहट से जबकि जोड़ रखे हैं कितने रिश्ते - नाते सां...
27 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 31 मई 2013
यादें बचपन की... संध्या शर्मा
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बीती यादें उमड़ -घुमड़ के आ रही रही हैं मेरे मन में कैसे-कैसे वो दिन हैं बीते क्या-क्या छूटा बचपन में रोज सबेरे सूरज आता स्वर्ण ...
15 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 24 मई 2013
बनो अग्रदूत..... संध्या शर्मा
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चाहते हो ??? बगुलों के बीच नीर-क्षीर विवेकी हंस होना ग्रहों से परिक्रमित होते प्रकाशित करते सौरमन्डल के सूर्य की तरह प्रतिपल चमकना तो भेड़ प...
18 टिप्पणियां:
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