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मेरी कविताएं
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शुक्रवार, 31 मई 2013
यादें बचपन की... संध्या शर्मा
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बीती यादें उमड़ -घुमड़ के आ रही रही हैं मेरे मन में कैसे-कैसे वो दिन हैं बीते क्या-क्या छूटा बचपन में रोज सबेरे सूरज आता स्वर्ण ...
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शुक्रवार, 24 मई 2013
बनो अग्रदूत..... संध्या शर्मा
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चाहते हो ??? बगुलों के बीच नीर-क्षीर विवेकी हंस होना ग्रहों से परिक्रमित होते प्रकाशित करते सौरमन्डल के सूर्य की तरह प्रतिपल चमकना तो भेड़ प...
18 टिप्पणियां:
रविवार, 19 मई 2013
लघु कथाएं... संध्या शर्मा
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लघु कथा-1 दो निवाले सुख के उन्हें रिटायर हुए एक बरस भी न हुआ था कि पत्नी साथ छोड़ गई, जमा पूंजी का कुछ हिस्सा उसके इलाज़ में और बाकी बे...
23 टिप्पणियां:
शनिवार, 4 मई 2013
जय हिन्द.... संध्या शर्मा
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टूट चुका बाँध तबाही मची है सब कुछ बह गया कब तक सहोगे अन्याय - अत्याचार स्वाभिमान पर प्रहार प्रतीक्षा कैसी??? पानी के बुलबुलों क...
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