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मेरी कविताएं
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सोमवार, 25 फ़रवरी 2013
रमतूला... संध्या शर्मा
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बड़ी मुश्किल से रात कटती कब सुबह हो और उसे मिलूं भुनसारे की चिरैया के जागते ही जग जाती थी वो पता नहीं क्यों बहुत भाता था संग उसका सिर...
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मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013
पगडंडी खुशियों की... संध्या शर्मा
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राह न मिली खुशियों की तो क्या/ देखो न ये पगडंडियाँ भी वहीँ तक जाती हैं चुन लेंगे कोई एक सोंधी सोंधी माटी की खुश्बू से महकती नन्ही-नन्ही झा...
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मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013
रंग बासंती …… संध्या शर्मा
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महुआ महके टेसू दहके, बौराए आमों के बौर, पीली-पीली सरसों फूली, कनेर फ़ूले हैं चहुं ओर. सुमनों के अधरों पर फ़ाग, भ्रमरों के भी डेरे ...
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शनिवार, 9 फ़रवरी 2013
मोड़.... संध्या शर्मा
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सुना है नहीं रहेगा गली के कोने का बिजली का खंभा जिससे टिककर खड़ी अपलक निहारती थी माँ ससुराल जाते हुए मुझे जब तक गली का मोड़ ना आ जाए मैं अब भ...
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