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मेरी कविताएं
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मंगलवार, 29 जनवरी 2013
पहरा.... संध्या शर्मा
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बावली है... आजकल उसे चंदामामा, बिल्ली मौसी, चिड़िया रानी, परियों के सपने नहीं आते उनकी जगह सियार, भेड़िये,सांप धुंए के उड़ते हुए बवंडरों न...
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शुक्रवार, 25 जनवरी 2013
गणतंत्र …… संध्या शर्मा
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झोंपड़ियों से बंगलों तक तहसील से थानों तक अफ़सरों से नेताओं तक गलियों से चौबारों तक जंगल से शहरों तक हर जगह ...
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गुरुवार, 24 जनवरी 2013
बेटाडीन मांगता अश्वत्थामा...संध्या शर्मा
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दुखों से प्यार है, मुझे यही कहा था ना तुमने और मुझे... तुम पर फक्र है जख्म को सहेजा वेदनाओं की सीमा से परे बगै...
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सोमवार, 21 जनवरी 2013
पगार........संध्या शर्मा
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साहित्य की सभी विधाओं का अपना-अपना महत्व है। जिसमें कहानी, कविताएं, व्यंग्य, यात्रा वृतांत, रिपोर्ताज इत्यादि होते हैं। मेरा ध्यान सिर्फ...
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