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मेरी कविताएं
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सोमवार, 31 दिसंबर 2012
सूर्योदय होगा...संध्या शर्मा
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जानती हूँ मैं जो भी घटा पहली बार नहीं सदियाँ हो गई घटते ज़ुल्म सहते-सहते फिर भी आशान्वित हूँ विपरीत परिस्थितियों में यातनाओं से डरी नहीं ह...
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शनिवार, 29 दिसंबर 2012
प्रीतनिया.... संध्या शर्मा
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गीत नया क्या गाऊं साथी छेड़ूँ क्या वीणा पर तान क्रंदन उर की हर धडकन में पीड़ा होती प्रबल महान छूटी लय,ताल बिखरी है बिसरा सकल स...
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रविवार, 23 दिसंबर 2012
अंतर्द्वंद...संध्या शर्मा
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क्या बताओगे आने वाली पीढ़ी को कि सिर्फ दिमाग लेकर ही पैदा हुआ था आज का इंसान दिल नहीं था इसके पास निज स्वार्थ के आगे मानवता भी भूला द्...
26 टिप्पणियां:
गुरुवार, 20 दिसंबर 2012
जीवन चदरिया...संध्या शर्मा
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मन मेरा कह रहा है एक जीवन चदरिया बुनूं बुन सकूंगी क्या इसे?? जितना सोचा था आसान उतना ही कठिन लग रहा है कैसे डालूं ताना-बाना एक - दो ...
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