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मेरी कविताएं
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शनिवार, 24 दिसंबर 2011
मंद मन मृदंग आघात करो... संध्या शर्मा
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चलो तुम कुछ शुरुआत करो जहां तक बने कु...
30 टिप्पणियां:
सोमवार, 19 दिसंबर 2011
अंतिम कविता... संध्या शर्मा
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सृष्टि के अंतिम दिन उसके और हमारे बीच कोई नहीं होगा तब मृत्यु एक कविता होगी एक अंतिम कविता बिना किसी भेद-भाव के स्वागत करेगी सबक...
32 टिप्पणियां:
सोमवार, 12 दिसंबर 2011
मौन के शब्द... संध्या शर्मा
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तारों में हँसती फूलों सी खिलती आज भी इस मन में बसती है तू मिट्टी की खुश्बू अब भी तुझे लुभाती है पहिली बारिश में अब भी भीगती है तू अ...
32 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011
अल्हड़ बादल.... संध्या शर्मा
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कभी कविता मिल जाती थी विद्यार्थियों के अल्हड चेहरे पर कोतुहल भरे भाव दिखते थे नन्ही सी सुन्दर आँखों में अब ना चेहरे पर पहचान है ना ही आ...
28 टिप्पणियां:
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