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मेरी कविताएं
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शुक्रवार, 6 मार्च 2026
हर एक सफर की कहानी लिखो... संध्या शर्मा
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हर एक सफर की कहानी लिखो, दिल की धड़कनों की रवानी लिखो। रास्तों में बिखरी है गुलों की महक, बाद-ए-सबा की मेहरबानी लिखो। कैसे मिलते हैं लोग कही...
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रविवार, 22 फ़रवरी 2026
इक ऐसी जगह हो...!
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न जाने कब से सोच रही हूँ ऐसी जगह जाने की, जहाँ जाते ही जगहें मुझे गले लगाते हुए पूछें— "इतने दिन कहाँ थी? कैसी है?" जहाँ हर पेड़ ...
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बुधवार, 3 दिसंबर 2025
ये क्या है...? संध्या शर्मा
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ये क्या है? ये पुलक है, ये झंकार है, ये अधूरे बोलों का संचार है। ये चुप्पी में सिमटा कोलाहल है, ये मन से उठता हालाहल है। ये क्या है? ये प्र...
9 टिप्पणियां:
बुधवार, 16 जुलाई 2025
एक ख़त बीते लम्हों के नाम... संध्या शर्मा
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एक ख़त लिखना चाहती हूँ मैं, उन गुजरे पलों के नाम, जो छू गए थे मन को कभी और खो गए थे वक़्त के अंधेरों में। काग़ज़ पे उतर आएँगे, कुछ धुंधले...
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बुधवार, 18 जून 2025
सहनशीलता का प्रकाश... संध्या शर्मा
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जब शरीर की थकी लकीरें आत्मा को घेर लेती हैं और मन के कोलाहल में एक सन्नाटा छा जाता है। तब भीतर के मंदिर में खड़ी होती आत्मा विनीत उस...
11 टिप्पणियां:
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