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गुरुवार, 31 दिसंबर 2020
धरती की वेदना - जन्मा कोरोना
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धरती माँ ने सही असह्य वेदना जन्मा कोरोना कभी रफ़्तार होती थी मायने ज़िंदगी की थम गई दुनिया एक ही पल में धरा ने खोल दिया अपने घर का झरोखा आसम...
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गुरुवार, 13 अगस्त 2020
कुछ मन ने कहा ....
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आँचल उड़ा नभ से बादल गिरा आह छन गई प्रीत बन गई भावनाएं गहराई अबीर बन गई गीत बरसे स्वर झनझनाने लगे बिन बाती बिन तेल दीप जगमगाने लगे....
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सोमवार, 9 मार्च 2020
होली है भई होली है ....
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रंग-अबीर-गुलाल उड़ाती ढोल-नगाड़े-चंग बजाती फिरती मस्तों की टोली है होली है भई होली है कहीं फाग, कहीं पर रसिया...
5 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020
अधूरे सपनों की कसक......
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‘सपने’ सिर्फ़ कहानी नही, यह तो एक... सफ़र है – ज़िंदगी का सफ़र। जहाँ आँखें सपने देखती हैं, उनमे से कुछ पूरे होते हैं तो कुछ अधूरे रह जा...
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