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मेरी कविताएं
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रविवार, 14 अगस्त 2016
आज़ादी....!
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एक बात कहूँ..? खरीदोगे तो अपमान करोगे सड़कों पर फेंकोगे न खरीदोगे तो नन्हे मज़दूरों का साल भर का इन्तज़ार व्यर्थ चलो मा...
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बुधवार, 10 अगस्त 2016
रिमझिम के तराने लेकर आई बरसात …… संध्या शर्मा
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नौतपा की झुलसाने वाली गर्मी के बाद जब वर्षा की पहली फ़ुहार भूमि पर पड़ती है तो झींगुर का मन नाच उठता है, दादुरों को पुन: जीवन मिल जाता है औ...
7 टिप्पणियां:
शनिवार, 16 जुलाई 2016
बुंदेली लोकगीतों में जल का महत्व... संध्या शर्मा
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पृथ्वी का अमृत जल को कहा गया है, अगर जल न हो तो यह वसुंधरा जल जाए। प्राणियों का अस्तित्व ही मिट जाए, इसलिए हमारे पूर्वजों ने जल का हमेशा...
10 टिप्पणियां:
रविवार, 3 जुलाई 2016
युगों के पार...
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सच-सच कहना मेरा-तुम्हारा कब का रिश्ता है ? क्यों लगती हो मुझे इतनी अपनी सी ? क्यों बुलाती हो मुझे इतने प्यार ...
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