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मेरी कविताएं
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शुक्रवार, 20 मार्च 2015
नव संवत्सर- गुड़ी पाड़वा
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चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को 'गुड़ी पाड़वा' या नववर्ष का आरम्भ माना गया है। ‘गुड़ी’ का अर्थ होता है विजय पताका । इसे हिन्दू नव स...
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शुक्रवार, 13 मार्च 2015
मन, शहरी नही हुआ ...
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... रोटी, मन, गाँव, शहर सब्जी तरकारी में फूलों की क्यारी में रोटी के स्वाद में पापड़ अचार में मेवों पकवानों में ऊँचे मका...
11 टिप्पणियां:
बुधवार, 4 मार्च 2015
होली के रंग...
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होली के रंग पुलकित है मन पिया के संग प्रीत फ़ुहार पिचकारी की धार टेसू के संग मन मलंग बिन पिए ही भंग बना पतंग ...
14 टिप्पणियां:
रविवार, 22 फ़रवरी 2015
अपनो छोटो सो घरगूला.....
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हिराने अंगना बिसरे चूल्हा कहाँ डरे अब बरा पे झूला भूले चकिया सूपा, फुकनी नहीं दिखे ढिग छुई की चिकनी ओझल भये गेरू के फूल गाँव गलिन की गुईय...
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