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मेरी कविताएं
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शुक्रवार, 15 अगस्त 2014
आशाएं मेरे देश की ...
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स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं... जय हिन्द ! ..... विदेशी परतंत्रता से मुक्त आधी शताब्दी के बाद भी सामाजिक, आर्थिक धार्...
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सोमवार, 4 अगस्त 2014
सहचर रास्ते ...
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पथ से बिना डिगे हर स्थिति हर तकलीफ से जूझते हुए हर रात तारों के साथ बतियाती हूँ/बिताती हूँ रात कटती है हर पल राह बनाते नए ख्वाब बुनते ...
10 टिप्पणियां:
गुरुवार, 31 जुलाई 2014
सुने कविता: रंगमंच... संध्या शर्मा
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यह कविता तो पुनः पोस्ट की है हमने, इसलिए इसे आप पहले भी पढ़ चुके हैं. अब सुनिए हमारी आवाज़ में :) (पहली बार कोशिश की है) करती हूँ अभिनय ...
14 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 18 जुलाई 2014
बरखा की रुत तुम भूल न जाना...
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बरखा की रुत तुम भूल न जाना, सजना अब आ जाना, आज बदरिया झूम के बरसी, संग सावन पींग झुलाना।। बूंद बूंद से घट भर जाए ताल तलैया भी हरसाए जा...
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