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मेरी कविताएं
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गुरुवार, 31 जुलाई 2014
सुने कविता: रंगमंच... संध्या शर्मा
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यह कविता तो पुनः पोस्ट की है हमने, इसलिए इसे आप पहले भी पढ़ चुके हैं. अब सुनिए हमारी आवाज़ में :) (पहली बार कोशिश की है) करती हूँ अभिनय ...
14 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 18 जुलाई 2014
बरखा की रुत तुम भूल न जाना...
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बरखा की रुत तुम भूल न जाना, सजना अब आ जाना, आज बदरिया झूम के बरसी, संग सावन पींग झुलाना।। बूंद बूंद से घट भर जाए ताल तलैया भी हरसाए जा...
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मंगलवार, 15 जुलाई 2014
नर्मदा माई की गोद में हम...
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अमरकंटक सुंदर धार्मिक स्थल है, शास्त्रों में यह शैव क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। जब हम कक्षा नवमी में पढ़ते थे, मीडिया सेंटर द्वारा आय...
15 टिप्पणियां:
शनिवार, 5 जुलाई 2014
करतब...
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मुक्ति पा लेता है........! अपराधी एक बार सूली पर चढ वह निरपराध पेट की खातिर सूली पर चढती है रोज - रोज रस्सी पर डगमगाते नन्हे प...
13 टिप्पणियां:
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