पेज
(यहां ले जाएं ...)
मुखपृष्ठ
मेरी कविताएं
▼
शुक्रवार, 27 जनवरी 2012
रेखाएं कुछ कहती हैं... संध्या शर्मा
›
ऐसी ही है वह खूब बोलना चाहती है पर बोलती नहीं जब बोलने को कहो कह देती है कुछ नहीं कहना हाँ लेकिन उसी वक़्त उन मुरझाई आँखों से टपक जाती हैं ...
29 टिप्पणियां:
बुधवार, 25 जनवरी 2012
दे सकोगे जबाब???? संध्या शर्मा
›
वक़्त कल तुमसे हिसाब मांगेगा सुलगते सवालों का जवाब मांगेगा क्यों बैचैन हो गया है बचपन क्यों है जवानों के चहरे पर उलझन क्यों खनकते नहीं...
15 टिप्पणियां:
गुरुवार, 19 जनवरी 2012
वज्र विश्वास... संध्या शर्मा
›
मज़बूत विश्वास की जड़ किसी तूफ़ान बहाव से नहीं हिलती विश्वास पानी में उठता बुलबुला नहीं जो मिट जाये एक पल में ही विश्वास सिद्धा...
31 टिप्पणियां:
रविवार, 15 जनवरी 2012
देख लूँ जरा.... संध्या शर्मा
›
विषयुक्त वातावरण में, अमृत कलश खोज लूँ जरा. क्षण के इस जीवन का मंथन कर, दो घूंट अमृत के पी लूँ जरा. शब्दों में समेट दूँ साँसों को, गीत...
22 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें