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मेरी कविताएं
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गुरुवार, 23 जून 2011
तेरी राह हूँ मंजिल नहीं......... संध्या शर्मा
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तेरी राह हूँ मंजिल नहीं कश्ती हूँ साहिल नहीं वक़्त की आंधी चलेगी इस तरह.............! कश्ती कहीं और साहिल कहीं राह कहीं मंजिल कहीं....
32 टिप्पणियां:
शनिवार, 11 जून 2011
हम एक गीत गुनगुनाते हैं........ संध्या शर्मा
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राह दुनिया की वो दिखाते हैं, हम तो गलियां भी भूल जाते हैं. उनकी यादों का सहारा लेकर, अपनी तनहाइयाँ सजाते हैं. जिनको समंदर डुबो नहीं सक...
37 टिप्पणियां:
रविवार, 29 मई 2011
क्यों नहीं अपनी हस्ती......... संध्या शर्मा
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उसकी इजाज़त के बगैर जब पत्ता भी नहीं हिलता है, वह ख़ामोशी से दुनिया का तमाशा क्यों देखता है .. क्या सब कुछ उसकी मर्जी से ही होता है...? क...
43 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 20 मई 2011
प्रलय.......... संध्या शर्मा
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सुना है प्रलय आएगा, तो क्या....? कोई ज्वालामुखी फटेगा, या तूफ़ान आयेगा, या कोई बाढ़ या अकाल, काल के गाल की तरह, इस धरती को निगल...
33 टिप्पणियां:
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